गुरुवार, 19 नवंबर 2015

मइल हाथ के होत हे

मइल हाथ के होत हे, तोर चुने सरकार ।
अपन आप ला देख ले, फेर बोल ललकार ।।

देश राज हा तोर हे, खुद ला मालिक जान ।
लोकतंत्र के राज मा, चलय तोर फरमान ।।

अपन आप ला भूल के, गे नेता दरबार ।
लालच मा मतदान के, भोग सजा सौ बार ।।

प्रांतवाद के बात हा, छाये काबर देश ।
काम आय हे वोट बर, मिटे कहां हे क्लेश ।।

तोर रीति संस्कार हा, हे गा तोरे हाथ ।
अपने ला बिसराय के, ठोकत हस अब माथ ।।