रविवार, 6 दिसंबर 2015

पढई ले का फायदा

पढई ले का फायदा, अउ का हे नुकसान ।
तउल तराजू देख ले, अनपढ अउ विद्वान ।।
कुवर गोफरी कस कुवर, पढ़ के मनखे होय ।
आखर आखर बूॅद ले, अपन केरवछ धोय ।
विद्या ले आथे विनय, विनय बनाथे योग्य ।
योग्य बने धन आय हे, धन ले धरमी भोग्य ।
सही गलत के फैसला, करथे सोच विचार ।
दुनिया-दारी जान के, करथे सद् व्यवहार ।।
शिक्षा के ये लक्ष्य हा, लगथे आज गवाय ।
पाये बर तो नौकरी, लोगन सबो पढ़ाय ।।
जेला देखव तेन हा, कहय एक ठन बात ।
पढ़े लिखे मा काम के, मिलथे भल सौगात ।।
काबर कोनो ना कहय, पाये बर संस्कार ।
नीत-रीत ला जान लय, लइका पढ़े हमार ।
पढ़े लिखे मनखे इहां, बिसराये संस्कार ।
अंग्रेजी के चोचला, चारो कोती झार ।
हिरदय मा धर हाथ तै, एक बार तो सोच ।
चलन घूस के देश मा, कइसे आये नोच ।
कोन अंगूठा छाप हा, काला दे हे घूस ।
पढ़े-लिखे बाबू मनन, पढ-लिख ले हे चूस ।
अपने दाई अउ ददा, करे निकाला कोन ।
पढ़े-लिखे ले पूछ ले, कइसे साधे मोन ।।
खेत खार ला बेच के, जेला ददा पढ़ाय ।
साहब होके बेटवा, ओही ला भूलाय ।।
पढ़े लिखे के चोचला, अपन रौब देखाय ।
पार्टी-सार्टी ओ करय, दारू-मंद बोहाय ।।
पढ़े लिखे बेटी बहू, कोरा लइका छोड़ ।
बिन जरूरत करथे बुता, ममता ले मुॅह मोड़ ।।
झेल सहय ना एक दिन, तुरत रहय बिलगाय ।
पढ़े लिखे अइसन बहू, का बाचा पढ आय ।।
पढ़े लिखे के फायदा, एके ठन हे सार ।
पइसा बने कमाय के, सीखे हे संस्कार ।।