शनिवार, 23 जनवरी 2016

दो मुक्तक

1-
एक बेटा होके दाई बर शेर होगे ।
बहिनी बर कइसे तै ह गेर होगे ।।
एक अनचिनहार नोनी ला पाये
तैं बघवा होके आज ढेर होगे ।।

2-
ददा दाई के खूब सुने
भाई भौजी ला घला गुने
सास ससुरार ला पाये
काबर अपन माथा धुने ।।
-रमेश चौहान