मंगलवार, 5 जनवरी 2016

चार ठन दोहा

मनखे लीला तोर तो, जाने ना भगवान ।
बन गे दानव देवता, बने नही इंसान ।।

गाली अपने आप ला. कब तक देहू आप ।
चाल ढाल अपने बदल. काबर करथस पाप ॥

करथे सब झन गोठ भर. काम करय ना कोय ।
काम कहू सब झन करय. गोठे काबर होय ॥

बदलव अपने आप ला. बदल जही संसार ।
देख देख संसार ला. काबर बदले झार ॥

तहूँ बने गुरु अउ महूँ. चेला बनही कोन ।
पूछ पूछ ओखर डहर. काबर ब इठे मोन ॥
-रमेश चौहान