सोमवार, 1 फ़रवरी 2016

कहमुकरी

1.
चुन्दी मोरे ओ सहलाथे ।
वोही मोरे मांघ बनाथे ।।
रूप सजाथे जेने संगी ।
का सखि ?
जोही !
ना सखि कंघी ।

2.
ओ हर अइसे करे कमाल ।
चमकत हवे मोर चोच लाल ।
लाज म जावत हे मोर जान ।
का सखि ?
जोही !
नहीं रे पान ।

3.
कान मेर आके जेने बोले ।
परे नींद मा आॅखी खोले ।।
गुस्सा आथे मोला अक्सर
का सखि ?
जोही !
नहि रे मच्छर ।