मंगलवार, 23 फ़रवरी 2016

बैरी कोने देश के, कोने हवय मितान

बैरी कोने देश के, कोने हवय मितान ।
देखव आंखी खोल के, मनखे के पहिचान ।

अपने कुरिया अपन हे, पर के हा बेकार ।
बासी चटनी चाट लव, झन बोहावव लार ।।
मुसवा बन के छेद मत, अपने कोठी धान । बैरी कोने देश के....

भड़वा बरतन चार ठन, करे भले हे शोर ।
टोरव फोरय ना कभू, कोनो एको कोर ।।
सासर कप रहिथे जुड़े, राखे अपने मान । बैरी कोने देश के....

कुरिया सोहे रेंगान मा, अॅगना चारो खूट ।
जुरमिल गांव बनाय हे, ऐमा होय न फूट ।
कहे कहां परछी कभू, तैं आने मैं आन । बैरी कोने देश के....

गड़ गे काॅटा पाॅव मा, हेर निकालव फेंक ।
परे पाॅव मा घाव हे, नून लगा के सेंक ।।
अभी सहीलव पीर ला, अपने गोड़े जान । बैरी कोने देश के....