सोमवार, 14 मार्च 2016

दरत हवय छाती मा कोदो

दरत हवय छाती मा कोदो,  होके हमरे भाई ।
हमरे घर मा संगे रहिके, मुॅह ले फोरय लाई ।।

कोड़त हावे घर के भिथिया, हाथ धरे ओ साबर ।
ऐही घर मा पले बढ़े हे, बैरी होगे काबर ।।
बात परोसी के माने हे, घर मा कोड़े खाई ।
दरत हवय छाती मा कोदो,  होके हमरे भाई ।

हम जेला तो आमा कहिथन, ओ हर कहिथे अमली ।
घात करे बर बइठे रहिथे, ओढ़े ओ हर कमली ।
जुझय नही ओ बैरी मेरा, घर मा करे लड़ाई  ।
दरत हवय छाती मा कोदो,  होके हमरे भाई ।

अपने घर ला फोर खड़े हे, तभो कहय मैं बेटा ।
मुॅह मा ओखर आगी लागे, घर हा फसे चपेटा ।
करे हवय ये बारे आगी, बैरी के अगुवाई ।
दरत हवय छाती मा कोदो,  होके हमरे भाई ।

बेटा ओ तो ओखर  आवय, ये घर जेन बसाये ।
काखर फांदा फस के वो हर, आगी इहां लगाये ।
दाई के अचरा छोड़े अब, माने ना वो दाई ।
दरत हवय छाती मा कोदो,  होके हमरे भाई ।

दाई के आॅखी ले झरथे, झरर झरर अब पानी ।
सहत हवे अंतस मा पीरा , सुन सुन जहर जुबानी ।
देख सकव ता देखव बेटा, दाई तोरे अकुलाई ।
दरत हवय छाती मा कोदो,  होके हमरे भाई ।