शुक्रवार, 1 अप्रैल 2016

मैं पगला तैं पगली होगे (युगल गीत)

नायक-
मैं पगला तैं पगली होगे, बोले ना कुछु बैना ।
ठाढ़े ठाढ़े देखत रहिगे, गोठ करे जब नैना ।

नयिका-
मैं पगली तैं पगला होगे, बोले ना कुछु  बैना ।
ठाढ़े ठाढ़े देखत रहिगे, गोठ करे जब नैना ।

नायक-
तोरे हाॅसी फासी होगे, जीना मरना एके ।
तोला छोड़े रेगंव जब जब, हाॅसी रद्दा छेके ।
तोर बिना जोही अब मोला, आवय नही कुछु चैना ।
मैं पगला तैं पगली होगे.......

नायिका-
धक धक जियरा मोरे करथे, देखे बर गा तोला ।
तोर बिना अब का राखे हे, का मन अउ का चोला ।
सांस सांस मा बसे हवस तैं, मिलय कहां अब चैना ।
मैं पगली तैं पगला होगे....

नायक-
मैं पाठा के मछरी जइसे, खोजत रहिथव पानी ।
जी मा जी तब आही जब तैं, होबे घर के रानी ।
डोला साजे तोला लाहू, सुन ले ओ फुलकैना ।
मैं पगला तैं पगली होगे.......

नायिका-
सुवा पिंजरा के जइसे मैं हर, खोलत रहिथंव पांखी ।
दाना पानी छोड़े बइठे, पानी ढारंव आंखी ।
आही मोरे राजकुवर हा, काटे बर ये रैना ।
मैं पगली तैं पगला होगे....