सोमवार, 25 अप्रैल 2016

छत्तीसगढ़ दाई के

छत्तीसगढ़ दाई के, परत हंन पांव ला ।
जेखर लुगरा छोरे, बांटे हे सुख छांव ला ।

पथरा कोइला हीरा, जेन भीतर मा भरे ।
सोंढुर अरपा पैरी, छाती मा अपने धरे ।।

जिहां के रूख राई मा, बनकठ्ठी गढ़े हवे ।
जिहां के पुरवाही मा, मया घात घुरे हवे ।।

अनपढ़ भले लागे, इहां के मनखे सबे ।
फेर दुलार के पोथी, ओखर दिल मा दबे ।।

छत्तीसगढि़या बेटा, भुईंया के किसान हे।
जांगर टोर राखे जे, ओही हमर शान हे ।।