शनिवार, 28 मई 2016

रखबे बात ल काढ़

ले मनखेपन सीख । नोनी देवय भीख 
कोनो मरय न भूख । होय न भले रसूख

उघरा के तन ढाक । नंगरा ल झन झाक
भूखाये  बर  भात । रोवइया बर बात

हमरे देश सिखाय । नोनी सुघर निभाय
देखत बबा अघाय । दूनो हाथ लमाय

देवय बने अशीष । दिल के रहव रहीस
नोनी करय सवाल । काबर अइसन हाल

मांगे काबर भीख । सुनके लागय बीख
बबा हा गुनमुनाय । चेथी ला खजुवाय

का नोनी ल बतांव । कइसे के समझांव
मोरो  तो  घरद्वार । रहिस एक परिवार

बेटा बहू हमार । हवय बड़ होशियार
पढ़े लिखे जस भेड़ । हे खजूर कस पेड़

ओ बन सकय न छांव । छोड़ रखे अब गांव
न अपन तीर बलाय । न मन मोर बहलाय

जांगर मोर सिराय । कइसे देह कमाय
करथे बवाल पेट । तभे धरे हंव प्लेट

नोनी तैं हर बाढ़ । रखबे बात ल काढ़
जाबे जब ससुरार । धरबे बात हमार