सोमवार, 16 मई 2016

कहमुकरिया

1.
जेखर आघू  मा मैं जाके ।
देखंव अपने रूप लजा के ।
अपने तन ला करके अर्पण ।
का सखि ?
जोही ।़
नहि रे दर्पण ।
2.
जेखर खुषबू तन मन छाये ।
जेला पा के मन हरियाये ।
मगन करय ओ, जेखर रूआब
का सखि ?
जोही ।़
नहि रे गुलाब ।
3.
तोर मांग सब पूरा करहू।
कहय जेन हा बिपत ल हरहू ।
कर न सकय कुछु, बने चहेता
का सखि ?
जोही ।़
नहि रे नेता ।