मंगलवार, 17 मई 2016

पेट के पूजा

पेट बर जीना । मौत रोजीना
पेट भर खाना । जी भर कमाना

पेट के चिंता । करथे मुनिंता
कहां ले पाबे । कइसे कमाबे

जब जनम पाये । दाई पियाये
दूध म अघाये । पिये बउराये

थोरकुन बाढ़े । अॅंगना म माढ़े
मुॅह ला जुठारे ।  दाई सवारे

खाई खजेना । हाथ भर लेना
ददा जब देथे । गोदी म लेथे

लइका कहाये । खेल म भुलाये
कई घा खाये । घूमत पहाये

कभू ना सोचे । पेट भर नोचे
काखर भरोसा । पांचे परोसा

आये जवानी । परे हैरानी
ददा अउ दाई । मांगे कमाई

काम ला खोजे । दिन रात रोजे
पर के सपेटा । खाये चपेटा

तभे तो जाने । सब ल पहिचाने
काम ले कोने । बड़े हे जोने

जब घर बसाये । स्वामी कहाये
दिन रात फेरे । जांगर ल पेरे

पेट के सेती । करे तैं खेती
परिवार पोशे । करम ना कोसे

बेरा पहागे । जांगर सिरागे
डोकरा खासे । छोकरा हासे

बहू अउ बेटा । लगय गरकेटा
पेट हे खाली । टूरा मवाली

मरे के पारी । लोटा न थारी
पेट के पूजा । करे ना दूजा