शुक्रवार, 20 मई 2016

एक रहव न यार

दाई हमर आय । जेखर हमन जाय
छत्तीसगढ़ मोर । देखव सब निटोर

हे जंगल पहाड़ । कइसन कइसन झाड़
नदिया नहर धार । धनहा अउ कछार

काजर असन कोल । काहेक अनमोल
हीरा धर खदान । बइठे हन नदान

माटी म धनवान। छत्तीसगढ़ जान
लूटे बर ग आय । रूप अपन बनाय

झोला अपन खांध । आये रहिन बांध
आके ग परदेष  । ओमन करत एष

मालिक असन होय । मही हमर बिलोय
घी ला कहय मोर । बाकी बचत तोर

बासी महिर खाय । हमन रहन भुलाय
उन्खर गजब षोर । हमला रखय टोर

मोर सुनव पुकार । एक रहव न यार
रख अपन पहिचान । मान अपन परान

जब रहब हम एक । लगबो सुघर नेक
करबो अपन राज । बैरी मन ल मार