गुरुवार, 2 जून 2016

बेटी ला शिक्षा संस्कार दौ

गजल
बहर-222, 222, 212

बेटी ला शिक्षा संस्कार दौ ।
जिनगी जीये के अधिकार दौ ।।

बेटी होथे बोझा जे कहे,
मन के ये सोचे ला टार दौ ।

दुनिया होथे जेखर गर्भ ले,
अइसन नोनी ला उपहार दौ ।

मन भर के उड़ लय आकाश मा,
ओखर डेना पांखी झार दौ ।

बेटी के बैरी कोने हवे,
पहिचानय अइसन अंगार दौ ।

बैरी मानय मत ससुरार ला
अतका जादा ओला प्यार दौ ।

टोरय मत फइका मरजाद के,
अइसन बेटी ला आधार दौ ।

ताना बाना हर परिवार के,
बाचय अइसन के संस्कार दौ ।