शुक्रवार, 3 जून 2016

का करबे आखर ला जान के

का करबे आखर ला जान के
का करबे दुनिया पहिचान के ।

घर के पोथी धुर्रा खात हे,
पढ़थस तैं अंग्रेजीस्तान के ।

मिलथे शिक्षा ले संस्कार हा,
देखव हे का हिन्दूस्तान के ।

सपना देखे मिल जय नौकरी
चिंता छोड़े निज पहिचान के ।

पइसा के डारा मा तैं चढ़े
ले ना संदेशा खलिहान के

जाती-पाती हा आरक्षण बर
शादी बर देखे ना छान के ।

मुॅह मा आने अंतस आन हे
कोने जानय करतब ज्ञान के ।