गुरुवार, 9 जून 2016

करिया बादर (घनाक्षरी छंद)

करिया करिया घटा, उमड़त घुमड़त
बिलवा बनवारी के, रूप देखावत हे ।
सरर-सरर हवा, चारो कोती झूम झूम,
मन मोहना के हॅसी, ला बगरावत  हे ।
चम चम चमकत, घेरी बेरी बिजली हा,
हाॅसत ठाड़े कृश्णा के, मुॅह देखावत हे ।
घड़र-घड़र कर, कारी कारी बदरी हा,
मोहना के मुख परे, बंषी सुनावत हे ।