शुक्रवार, 22 जुलाई 2016

कब तक हम सब झेलत रहिबो

कब तक हम सब झेलत रहिबो, बिखहर सांप गला लपेट ।
कभू जैष अलकायदा कभू, कभू नवा इस्लामिक स्टेट ।।

मार काट करना हे जेखर, धरम करम तो केवल एक ।
गोला बारूद बंदूक धरे, सबके रसता राखे छेक ।।

मनखे मनखे जेती देखय, गोला बारूद देथे फोड़ ।
अपन जुनुन मा बइहा होके, उधम मचावत हें घनघोर ।।

चिख पुकार अउ रोना धोना, मचे हवय गा हाहाकार ।
बिना मौत कतको मरत हंवय, देखव इन्खर अत्याचार ।।

नाम धरम के बदनाम करत, खेले केवल खूनी खेल ।
मनखे होके राक्षस होगे, मनखेपन ला घुरवा मेल ।।