शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

हरेली

सुख के बीजा बिरवा होके, संसो फिकर ल मेटय ।
धनहा डोली हरियर हरियर, मनखे मन जब देखय ।।

धरती दाई रूप सजावय, जब आये चउमासा ।
हरियर हरियर चारो कोती, बगरावत हे आसा ।।

सावन अम्मावस हा लावय, अपने संग हरेली ।
हॅसी खुशी ला बांटत हावय, घर घर मा बरपेली ।

कुदरी रपली हॅसिया नागर, खेती के हथियारे ।
आज देव धामी कस होये, हमरे भाग सवारे ।।

नोनी बाबू गेड़ी मच-मच, कूद-कूद के नाचय ।।
बबा खोर मा बइठे बइठे, देख देख के हाॅसय ।।