रविवार, 10 जुलाई 2016

राग द्वेष ला छोड़ दे

राग द्वेष ला छोड़ दे, जेन नरक के राह ।
कोनो ला खुश देख के, मन मा मत भर आह ।।

त्याग प्रेम के हे परख, करव प्रेम मा त्याग ।
स्वार्थ मोह के रंग ले, रंगव मत अनुराग ।।

जनम जनम के पुण्य ले, पाये मनखे देह ।
करले ये जीवन सफल, मनखे ले कर नेह ।।

अमर होय ना देह हा, अमर हवे बस जीव ।
करे करम जब देह हा, होय तभे संजीव ।।

रोक छेक मन हा करय, पूरा करत मुराद ।
मजा मजा बस खोज के, करय बखत बरबाद ।।