बुधवार, 10 अगस्त 2016

धन धन तुलसी दास ला,

धन धन तुलसी दास ला, धन धन ओखर भक्ति ला।
रामचरित मानस रचे,  कहिस चरित के शक्ति ला ।।

मरयादा के डोर मा, बांध रखे हे राम ला ।
गढ़य चरित मनखे अपन, देख राम के काम ला ।

जीवन जीये के कला, बांटे तुलसी दास हा ।
राम बनाये राम ला, मरयादा के परकाश हा ।।

रामचरित मानस पढ़व, सोच समझ के लेख लव ।
कइसे होथे संबंध हा, रामचरित ले देख लव ।।

राम राज के सोच हा, कइसे पूरा हो सकत ।
कोनो न सुधारे चरित, बोलत रहिथें बस फकत ।।