मंगलवार, 27 सितंबर 2016

गांव

मधुमालती छंद

सुन गोठ ला, ये धाम के। पहिचान हे, जे काम के
हम आन के, खाये सुता । धर खांध ला, करथन बुता

छोटे बड़े, देथे मया । सब आदमी,  करथे दया
सुख आन के, मन मा धरे । दुख आन के, सब झन भरे

काकी कका, भइया कहे । दाई बबा, सब बर सहे
हर बात ला, सब मानथे । सब नीत ला, भल जानथे

चल खेत मा, हँसिया धरे । हे धान मा, निंदा भरे
दाई कहे, चल बेटवा ।  मत घूम तै, बन लेठवा

ये देष के, बड़ शान हे । जेखर इहां तो मान हे
जेला कहे, सब गांव हे । जे स्वर्ग ले निक ठांव हे