शनिवार, 3 सितंबर 2016

बादर पानी मा कभू

बादर पानी मा कभू, चलय न ककरो जोर ।
कब होही बरखा इहां, जानय वो चितचोर ।।
जानय वो चितचोर, बचाही के डूबोही ।
वोही लेथे मार, दया कर वो सिरजोही ।
माथा धरे रमेश, छोड़ बइठे हे मादर ।
कइसे करय उमंग, दिखय ना पानी बादर ।।