रविवार, 4 सितंबर 2016

जस चश्मा के रंग होय

जस चश्मा के रंग होय । तइसे मनखे दंग होय
भाटा कइसे हवय लाल । पड़े सोच मा खेमलाल

चश्मा ला मन मा चढ़ाय । जग ला देखय हड़बड़ाय
करिया करिया हवय झार । ओ हा कहय मन ला मार

अपन सोच ले दुनिया देख । मनखे जग के करे लेख
तोर मोर हे एक रंग । कहिथे जब तक रहय संग

दुनिया हा तो हवय एक । दिखथे घिनहा कभू नेक
दुनिया के हे अपन हाल । तोरे मन के अपन चाल

दस अँगरी हे तोर हाथ । छोटे बड़े हवे एक साथ
मुठ्ठी बनके रहय संग । काबर होथव तुमन तंग