सोमवार, 5 सितंबर 2016

मुक्तक

मुक्तक
222 212, 211 2221
आखर के देवता, ज्ञान भरव महराज ।
बाधा के हरइया, कष्ट हरव महराज ।।
जग के गण राज तैं, राख हमर गा मान ।
हम सब तोरे शरण, हाथ धरव महराज ।।
-रमेश चौहान