सोमवार, 17 अक्तूबर 2016

काम ये खेती किसानी

   काम ये खेती किसानी, आय पूजा आरती ।
    तोर सेवा त्याग ले, होय खुश मां भारती ।।
    टोर जांगर तै कमा ले, पेट भर दे अब तही ।
    तै भुईयां के हवस गा, देव धामी मन सही ।। 1।।

    तोर ले हे गांव सुघ्घर, खेत पावन धाम हे ।
    तै हवस गा अन्नदाता, जेन सब के प्राण हे ।।
    मत कभू हो शहरिया तै, कोन कर ही काम ला ।
    गोहरावत हे भुईंयां, छोड़ झन ये धाम ला ।।2।।