शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2016

चमचा मन के ढेर हे

चमचा मन के ढेर हे
बात कहे मा फेर हे

गोड़ पखारत देखेंव जेला
ओही बने लठैत हे
पिरपिट्टी ओखर घर के
हमर मन बर करैत हे

कुकुर कस पूछी डोलावय
कइसे कहिदंव शेर हे

हाँक परे मा सकला जथे
मंदारी के डमरू सुन
बेंदरा भलुवा बन के कइसन
नाचथे ओखरे धुन

चारा के रहत ले चरिस
अब बोकरा कोन मेर हे