शनिवार, 10 दिसंबर 2016

//छत्तीसगढ़ी माहिया//

तोर मया ला पाके
मोर करेजा मा
धड़कन  फेरे जागे

तोर बिना रे जोही
सुन्ना हे अँगना
जिनगी के का होही

देत मिले बर किरया
मन मा तैं बइठे
तैं हस कहां दूरिहा

जिनगी के हर दुख मा
ये मन ह थिराथे
तोर मया के रूख मा

सपना देखय आँखी
तीर म मन मोरे
जावंव खोले पाँखी