बुधवार, 21 दिसंबर 2016

हमर देश कइसन

हमर देश कइसन, सागर जइसन, सबो धरम मिलय जिहां ।
सुरूज असन बनके, मनखे तन के, गुण-अवगुण लिलय इहां ।
पर्वत कस ठाढ़े, जगह म माढ़े, गर्रा पानी सहिके ।
आक्रमणकारी, हमर दुवारी, रहिगे हमरे रहिके ।।