बुधवार, 28 दिसंबर 2016

सबला देवव संगी काम

कोने ढिंढोरा पिटत हवय, जात पात हा होगे एक ।
हमर हमर चिल्लावत हावे, कट्टर होके मनखे नेक ।।

एक लाभ बर जात बताये, दूसर बर ओ जात लुकाय ।
बिन पेंदी के लोटा जइसे, ढुलमूल ढुलमुल ढुलगत जाय ।।

दू धारी तलवार धरे हे, हमर देश के हर सरकार ।
जात पात छोड़व कहि कहि के, खुद राखे हे छांट निमार ।।

खाना-पीना एके होगे, टूरा-टूरी घला ह एक ।
काबर ठाड़े हावे भिथिया, जात-पात के अबले झेक ।

सबले आघू जेन खड़े हे, कइसे पिछड़ा नाम धराय ।
सब ला जेन दबावत हावे, काबर आजे दलित कहाय ।।

जे पाछू मा दबे परे हे, हर मनखे ला रखव सरेख ।
मनखे मनखे एके होथे, जात पात ला तैं झन देख ।।

काम -धाम जेखर मेरा हे, जग मा होथे ओखर नाम ।
जेन हवे जरूरत के मनखे,  सबला देवव संगी काम ।।