शनिवार, 31 दिसंबर 2016

साल नवा

नवा सोच के नवा साल के बधाई

(दुर्मिल सवैया)
मनखे मनखे मन खोजत हे,  दिन रात खुशी अपने मन के ।
कुछु कारण आवय तो अइसे, दुख मेटय जेन ह ये तन के ।
सब झंझट छोड़ मनावव गा, मिलके  कुछु कांहि तिहार नवा ।
मन मा भर के सुख के सपना,  सब कोइ मनावव साल नवा ।।
-रमेश चौहान