बुधवार, 4 जनवरी 2017

मया ल ओ अनवासय

मुचुर-मुचुर जब हासय
ओ मोटीयारी
मया ल तो अनवासय


बिहनिया असन छाये
चुक लाली-लाली
सबके मन ला भाये

चिरई कस ओ चहकय
खोल अपन पांखी
मन बादर मा गमकय

फूल डोहड़ी फूले
झुमर-झुमर डारा
चारो-कोती झूले

अंतस मा मया धरे
आँखी गढियाये
बिन बोले गोठ करे