शनिवार, 14 जनवरी 2017

राम कथा के सार

राम  कथा मनखे सुनय, धरय नहीं कुछु कान ।
करम राम कस करय नहि, मारत रहिथे शान ।।

राम भरत के सुन कथा, कोने करय बिचार ।
भाई भाई होत हे, धन दौलत बेकार ।।

दान करे हे राम हा, जीते लंका राज ।
बेजा कब्जा के इहाँ, काबर हे सम्राज ।।

गौ माता के उद्धार बर,  जनम धरे हे राम ।
चरिया परिया छेक के,  मनखे करथे नाम ।।

करम जगत मा सार हे, रामायण के काम ।
करम करत रावण बनव, चाहे बन जौ राम ।

नैतिक शिक्षा बिन पढे, सब शिक्षा बेकार ।
थोर बहुत तो मान ले, मनखे बन संसार ।।

-रमेश चौहान