मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

-ददरिया-



हाथ धरे पर्स, पर्स म मोबाइल
चुपे चाप बोल ले, कर के स्माइल
मोर करेजा

मोर करेजा  उबुक-चुबुक तोला जोहे
तोला जोहे करेजा करे बर संगी
संगी मोर होइ जाबे ना

टाठ-टाठ जिंस पेंट, टाठे हे कुरता
तोर झूल-झूल रेंगना के आवत हे सुरता
मोर करेजा

मोर करेजा  उबुक-चुबुक तोला जोहे
तोला जोहे करेजा करे बर संगी
संगी मोर होइ जाबे ना
चढ़े स्कूटी, तै गली घूमे
नजर भेर देख, अपन हाथे चूमे
मोर करेजा

मोर करेजा  उबुक-चुबुक तोला जोहे
तोला जोहे करेजा करे बर संगी
संगी मोर होइ जाबे ना

कोहनी ले मेंहदी, अंगठा म छल्ला
गजब के सोहत हे, सब करे हल्ला
मोर करेजा

मोर करेजा  उबुक-चुबुक तोला जोहे
तोला जोहे करेजा करे बर संगी
संगी मोर होइ जाबे ना

एके गोड़ म पहिरे, रेशम के डोरी
सुटुर-सुटुर रेंगे, करके दिल ल चोरी
मोर करेजा

मोर करेजा  उबुक-चुबुक तोला जोहे
तोला जोहे करेजा करे बर संगी
संगी मोर होइ जाबे ना

बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

कहमुकरिया


1.
अपन बाँह मा भरथंव जेला ।
जेन खुशी बड़ देथे मोला ।।
मन हरियर तन लाली भूरी ।
का सखि ?
भाटो !
नहि रे
चूरी ।।

2.
बिन ओखर जेवन नई चुरय ।
सांय-सांय घर कुरिया घुरय ।।
जेन कहाथे घर के दूल्हा ।
का सखि ?
भाटो !
नहि रे,
चूल्हा ।।

3.
दुनिया दारी जेन बताथे ।
रिगबिग ले आँखी देखाथे ।
जेखर आघू बइठवं ‘सीवी‘
का सखि ?
भाटो !
नहि रे,
टीवी ।।

शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

मैं तो बेटी के बाप

//नवगीत//
दुख के हाथी मुड़ मा बइठे
कइसे बिताववं रात

टुकुर-टुकुर बादर ला देखत
ढलगे हवं चुपचाप
न रोग-राई हे न प्रेम रोग हे
मैं तो बेटी के बाप

कोन सुनही काला सुनावंव
अपन मन के बात

जतका मोरे चद्दर रहिस हे
ततका पांव मारेंव
चिरई कस चुन-चुन दाना
ओखर मुह मा डारेंव

बेटी-बेटा एक मान के
पढाय लिखाय हंव घात

कइसे कहंव अपन पीरा ल
मिलय न लइका अइसे
पढ़े-लिखे गुणवान होय
मोरे नोनी हे जइसे

पढ़ई-लिखई छोड़-छोड़ के
टुरा दारू म गे मात

जांवर-जीयर बिन बिरथा हे
नोनी के बुता काम
दूनो चक्का एक होय म
चलथे गाड़ी तमाम

आंगा-भारू कइसे फांदवं
लाके कोनो बरात

टूरा अउ टूरा के ददा
थोकिन गुनव सोचव
पढ़ई लिखई पूरा करके
काम बुता सरीखव

नोनी बाबू एक बरोबर
बाढ़त रहल दिन रात


-रमेश चौहान

बुधवार, 8 फ़रवरी 2017

बनय जोड़ी हा कइसे

कइसे मैं हर करव, बेटी के ग बिहाव ।
बेटी जइसे छोकरा, खोजे ल कहां जांव ।
खोजे ल कहां जांव, कहूं ना बने दिखे गा ।
दिखय न हमर समाज, छोकरा पढ़े लिखे गा ।
नोनी बी. ई. पास, मिलय ना टूरा अइसे ।
टूरा बारा पास, बनय जोड़ी हा कइसे ।।

शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

संगवारी

सुख दुख के तही संगवारी ।
तोर मया बर मै बलिहारी ।।
मोर संग तै देवत रहिबे ।
मोर भूल चूक सहत रहिबे ।

पाठ मितानी के धरे रहब ।
काम एक दूसर करत रहब ।।
तोर सबो पीरा मोरे हे ।
मोर सबो पीरा तोरे हे ।।

बिन तोरे ये जीनगी दुभर ।
बिन संगी हम जीबो काबर ।।
तोर मया जीनगी ल गढ़थे ।
मोला देखत तोला पढ़थे ।।

-रमेश चौहान