शनिवार, 4 फ़रवरी 2017

संगवारी

सुख दुख के तही संगवारी ।
तोर मया बर मै बलिहारी ।।
मोर संग तै देवत रहिबे ।
मोर भूल चूक सहत रहिबे ।

पाठ मितानी के धरे रहब ।
काम एक दूसर करत रहब ।।
तोर सबो पीरा मोरे हे ।
मोर सबो पीरा तोरे हे ।।

बिन तोरे ये जीनगी दुभर ।
बिन संगी हम जीबो काबर ।।
तोर मया जीनगी ल गढ़थे ।
मोला देखत तोला पढ़थे ।।

-रमेश चौहान