बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

कहमुकरिया


1.
अपन बाँह मा भरथंव जेला ।
जेन खुशी बड़ देथे मोला ।।
मन हरियर तन लाली भूरी ।
का सखि ?
भाटो !
नहि रे
चूरी ।।

2.
बिन ओखर जेवन नई चुरय ।
सांय-सांय घर कुरिया घुरय ।।
जेन कहाथे घर के दूल्हा ।
का सखि ?
भाटो !
नहि रे,
चूल्हा ।।

3.
दुनिया दारी जेन बताथे ।
रिगबिग ले आँखी देखाथे ।
जेखर आघू बइठवं ‘सीवी‘
का सखि ?
भाटो !
नहि रे,
टीवी ।।