शुक्रवार, 3 मार्च 2017

लोकतंत्र मा छूट हवे

आजादी हे बोलब के, तभे फूटत बोल ।
सहिष्णुता के ढाल धऱे, बजावत हस ढोल ।।
देश तोरे राज तोरे, अपन अक्कल खोल ।
बैरी कोन काखर हवे, तहुँ थोकिन टटोल ।।

जतका कर सकस कर बने, सत्ता के विरोध ।
लोकतंत्र मा छूट हवे, कोनो डहर ओध ।।
दाई असन हवय धरती, देश ला मत बाँट ।
आनी-बानी बक बक के, माथा ल झन चाट ।।