रविवार, 5 मार्च 2017

चल न घर ग

भृंग छंद नगण (111) 6 बार अंत म पताका (21)

चल न घर ग, बिफर मत न, चढ़त हवय दारू ।
कहत कहत, थकत हवय, लगत हवय भारू ।।
लहुट-पहुट, जतर-कतर, करत हवस आज ।
सुनत-सुनत, बकर-बकर, लगत हवय लाज ।।