बुधवार, 5 अप्रैल 2017

मूरख हमला बनावत हें

बॉट-बॉट के फोकट म
मूरख हमला बनावत हे

पढ़े-लिखे नोनी-बाबू के,
गाँव-गाँव म बाढ़ हे
काम-बुता लइका मन खोजय
येखर कहां जुगाड़ हे

बेरोजगारी भत्ता बॉट-बॉट
वाहवाही तो पावत हे

गली-गली हर गाँव के
बेजाकब्जा म छेकाय हे
गली-गली के नाली हा
लद्दी म बजबजाय हे

छत्तीगढ़िया सबले बढ़िया
गाना हमला सुनावत हे

जात-पात म बाँट-बाँट के
बनवात हे सामाजिक भवन
गली-खोर उबड़-खाबड़
गाँव के पीरा काला कहन

सपना देखा-देखा के
वोट बैंक बनावत हे

मास्टर पढ़ाई के छोड़
बाकी सबो बुता करत हे
हमर लइका घात होषियार
आघूच-आघूच बढ़त हे

दिमाग देहे बर लइका मन ला
थारी भर भात खवावत हे

गाँव म डॉक्टर बिन मनखे
बीमारी मा मरत हे
कोरट के पेशी के जोहा म
हमर केस सरत हे

करमचारी के अतका कमी
अपने स्टाफ बढ़ावत हे

महिला कमाण्ड़ो घूम-घूम
दरूवहा मन ला डरूवावय
गाँव के बिगड़े शांति ल
लाठी धर के मनावय

जनता के पुलिस ला धर
वो हा दारू बेचवावत हे