शनिवार, 22 जुलाई 2017

आगे सावन आगे ।

छागे छागे बादर करिया, आगे सावन आगे ।
झिमिर-झिमिर जब बरसे बदरा, मन मोरो हरियागे ।।

हरियर हरियर डोली धनहा, हरियर हरियर परिया ।
नदिया नरवा छलकत हावे, छलकत हावे तरिया ।।
दुलहन जइसे धरती लागय, देख सरग बउरागे ।
झिमिर-झिमिर जब बरसे बदरा, मन मोरो हरियागे ।।

चिरई-चिरगुन गावय गाना, पेड़-रुख हा नाचय ।
संग मेचका झिंगुरा दुनो, वेद मंत्र ला बाचय ।।
साज मोहरी डफड़ा जइसे, गड़गड़ बिजली लागे ।
झिमिर-झिमिर जब बरसे बदरा, मन मोरो हरियागे ।।

नांगर-बइला टेक्टर मिल के, करे बियासी धनहा ।
निंदा निंदय बनिहारिन मन, बचय नही अब बन हा ।।
करे किसानी किसनहा सबो, राग-पाग ला पागे
झिमिर-झिमिर जब बरसे बदरा, मन मोरो हरियागे ।।