SURTA ]- छत्तीसगढ़ी भाषा अउ छत्तीसगढ़ के धरोहर ल समर्पित

रमेशकुमार सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ी काव्यांजली:- सुरता rkdevendra.blogspot.com

सुरता साहित्य के धरोहर

ये बलॉग ‘सुरता‘ के अब अपन खुद के वेबसाइट ‘सुरता साहित्य के धरोहर ‘ मा घला जाके मोर जम्मा ब्लॉग ला एक जघा मा देख सकत हव ।  येखर संगे संग ...
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एकोठन सपना के टूटे, मरय न जीवन हर तोरे

एकोठन सपना के टूटे, मरय न जीवन हर तोरे

(श्री गोपालदास नीरज  की कविता‘‘जीवन नही मरा करता‘‘ से अभिप्रेरित) लुका-लुका के रोवइयामन, कान खोल के सुन लौ रे । फोकट-फोकट आँसु झरइया, बा...
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हिन्दी छत्तीसगढ़ी भाखा

हिन्दी छत्तीसगढ़ी भाखा

हिन्दी छत्तीसगढ़ी भाखा, अंतस गोमुख के गंगा । छलछल-छलछल पावन धारा, तन मन ला राखे चंगा ।। फेशन बैरी छाती छेदय, मिलावटी बिख ला घोरे । चुटुर-...
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जांघ अपने काट के हम, बनावत हन साख

जांघ अपने काट के हम, बनावत हन साख

धर्म अउ संस्कार मा तो, करे शंका आज । आंग्ल शिक्षा नीति पाले, ओखरे ये राज ।। देख शिक्षा नीति अइसन, आय बड़का रोग । दासता हे आज जिंदा, देश भ...
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दोष देत सरकार ला, सब पिसत दांत हे

दोष देत सरकार ला, सब पिसत दांत हे

दोष देत सरकार ला, सब पिसत दांत हे । ओखर भीतर झाक तो, ओ बने जात हे । जनता देखय नही, खुद अपन दोष ला । अपन स्वार्थ मा तो परे, बांटथे  रोष ल...
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तीन छंद-कुण्डल-कुण्डलनि-कुण्डलियां

तीन छंद-कुण्डल-कुण्डलनि-कुण्डलियां

//कुण्डल// काम-बुता करव अपन, जांगर ला टोरे । देह-पान रखव बने, हाथ-गोड़ ला मोड़े ।। प्रकृति संग जुड़े रहव, प्रकृति पुरूष होके । बुता करब प्...
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अब तो मत चूको चौहान

सबले पहिली माथ नवावय, हाथ जोर के तोर गणेश । अपन वंश के गौरव गाथा, फेर सुनावत हवय ‘रमेश‘ ।। अपन देश अउ अपन धरम बर, जीना मरना जेखर काम ।...
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छत्तीसगढ़ी काव्य शिल्प -छंद

छत्तीसगढ़ी काव्य शिल्प -छंद

छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ प्रांत की मातृभाषा एवं राज भाषा है । श्री प्यारेलाल गुप्त के अनुसार ‘‘छत्तीसगढ़ी भाषा अर्धभागधी की दुहिता एवं अवधी की सह...
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भभकत आगी ला जल्दी ले बुतोवव

भभकत आगी ला जल्दी ले बुतोवव

छत्तीस प्रकार सोच धरे छत्तीस प्रकार के मनखे छत्तीसगढ़ के संगे-संग हमर देश मा रहिथे जइसे कोनो फूल के माला मा रिकिम-रिकिम के फूल एक संग ...
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भगतन, श्रद्धा ला चढ़ात हे

भगतन, श्रद्धा ला चढ़ात हे

एती-तेती चारो कोती, ढोलक मादर संग, मंदिर-मंदिर द्वारे-द्वारे, जस हा सुनात हे । चुन्दी छरियाये झूपे, कोनो बगियाये झूपे, कोनो-कोनो साट बर,...
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‘‘गांव ले लहुटत-लहुटत‘

‘‘गांव ले लहुटत-लहुटत‘

श्री केदारनाथ अग्रवाल के कविता ‘चन्द्रगहना से लौटती बेर‘ के आधार मा छत्तीसगढ़ी कविता - ‘‘गांव ले लहुटत-लहुटत‘ देख आयेंव मैं गांव अब देख...
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धरे उदासी बोलय जमुना घाट

धरे उदासी बोलय जमुना घाट

धरे उदासी बोलय जमुना घाट । कती हवय अब छलिया तोरे बाट ।। नाग कालिया कई-कई ठन आज । मोरे पानी मा करत हवय राज ।। कहां लुका गे बासुरीवाला म...
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ददा (भुजंगप्रयात छंद, अतुकांत)

ददा (भुजंगप्रयात छंद, अतुकांत)

कहां देवता हे इहां कोन जाने । न जाने दिखे ओ ह कोने प्रकारे ।। इहां देवता हा करे का बुता हे । सबो प्रश्न के तो जवाबे ददा हे ।। ददा मोरे...
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मया(भुजंगप्रयात छंद, अतुकांत)

मया(भुजंगप्रयात छंद, अतुकांत)

                मया (भुजंगप्रयात छंद, अतुकांत) कहां देह के थोरको मोल होथे । मया के बिना देह हाड़ा निगोड़ा ।। मया के मया ले मया देह हो...
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अइसे कोनो रद्दा खोजव, जुरमिल रेंगी साथ

अइसे कोनो रद्दा खोजव, जुरमिल रेंगी साथ

मोटर गाड़ी के आए ले, घोड़ा दिखय न एक । मनखे केवल अपन बाढ़ ला, समझत हावे नेक ।। जोते-फांदे अब टेक्टर मा, नांगर गे नंदाय । बइला-भइसा क...
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ताते-तात

शिव-शिव शिव अस (डमरू घनाक्षरी)

डमरू घनाक्षरी (32 वर्ण लघु) सुनत-गुनत चुप, सहत-रहत गुप दुख मन न छुवत, दुखित रहय तन । बम-बम हर-हर, शिव चरण गहत, शिव-शिव शिव अस, जग दुख भर मन ...

अउ का-का हे इहाँ-