शनिवार, 30 जून 2018

बड़का बड़े, ये देश

हर जात ले, हर धर्म ले, आघू खड़े, ये देश ।
हे मोर ले, अउ तोर ले, बड़का बड़े, ये देश ।।
सम्मान कर, अभिमान कर, तैं भुला के, खुद क्लेष ।
ये मान ले, अउ जान ले, हे तोर तो, ये देश ।।

विरोध करव, सरकार के, जनतंत्र मा, हे छूट ।
पर देश के, तै शत्रु बन, सम्मान ला, झन लूट ।।
पहिचान हे, अभिमान हे, हमर सैनिक, हे वीर ।
अपन धरती, अउ देश बर, डटे रहिथे, धर धीर ।।

-रमेश चौहान

शुक्रवार, 29 जून 2018

//काम के अधिकार चाही//

छाती ठोक के, मांग करव अब, काम के अधिकार ।
हर हाथ मा तो, काम होवय, रहब न हम लचार ।।
हर काम के तो, दाम चाही, नई लन खैरात ।
हो दाम अतका, पेट भर के, मिलय हमला भात ।।

खुद गुदा खाथे, देत हमला, फोकला ला फेक ।
सरकार या, कंपनी हा, कहां कोने नेक ।।
अब काम के अउ, दाम के तो, मिलय गा अधिकार ।
कानून गढ़ दौ, एक अइसन, देश के सरकार ।।

गुरुवार, 28 जून 2018

फोकट मा झन बाँट

फोकट मा झन बाँट तैं, हमर चुने सरकार ।
देना हे ता काम दे, जेन हमर अधिकार ।।
जेन हमर अधिकार,  तोर कर्तव्य कहाये ।
स्वाभिमान ला मार, सबो ला ढोर बनाये  ।।
पैरा-भूसा डार, अपन बरदी मा ठोकत ।
लालच हमर जगाय, लोभ मा बाँटत फोकट ।।

फोकट फोकट खाृय के, मनखे होत अलाल ।
स्वाभिमान हा मरत हे, काला होत मलाल ।।
काला होत मलाल, निठल्ला हवय जवानी ।
काम-बुता ना हाथ, करत शेखी शैतानी ।
पइसा पावय चार, अपन जांगर ला झोकत ।
अइसे करव उपाय, बाँट मत अब कुछु फोकट ।।

बुधवार, 27 जून 2018

मया बिना जीवन कइसे

बिना तेल के दीया-बाती, हे मुरझाय परे ।
बिना प्राण के काया जइसे, मुरदा नाम धरे ।।
मया बिना जीवन कइसे, अपने दम्भ भरे ।
घाम-छाँव जीवन के जतका, सब ला मया हरे ।।

मंगलवार, 26 जून 2018

नीत-रीत दूसर बर काबर

निंद अपन आँखी मा आथे, अपन मुँह मा स्वाद ।
सुख ला बोहे हाँस-हाँस के, दुख ला घला लाद ।।
अपने कोठी अपने होथे, आन के हर भीख ।
नीत-रीत दूसर बर काबर, खुदे येला सीख ।।
-रमेश चौहान

बुधवार, 20 जून 2018

करत हवँव गोहार दाई

जय जय दाई नवागढ़ के, जय जय महामाय

करत हवँव गोहार दाई, सुन लेबे पुकार ।
एक आसरा तोर हावे, पूरा कर दुलार ।।

दुनिया वाले कहँव काला, मारत हवय लात ।
पइसा मा ये जगत हावे, जगत के ये बात ।।
लगे काम हा छूट गे हे, परय पेट म लात ।
बिना बुंता के एक पइसा, आवय नही हाथ ।।
काम बुता देवय न कोनो,  देत हे दुत्कार ।
करत हवँव गोहार दाई, सुन लेबे पुकार ।

नान्हे-नान्हे मोर लइका, भरँव कइसे पेट ।
लइकामन हा करय रिबि-रिबि, करँव कइसे चेत ।।
मोर पाप ला क्षमा करदौं, क्षमा कर दौ श्राप ।
काम-बुता अब हाथ दे दौ, कहय लइका बाप ।।

काम-बुता अउ बिना पइसा, हवय जग बेकार ।
करत हवँव गोहार दाई, सुन लेबे पुकार ।
करत हवँव गोहार दाई, सुन लेबे पुकार ।
एक आसरा तोर हावे, पूरा कर दुलार ।।

रविवार, 10 जून 2018

नवा जमाना आगे

मिलत नई हे गाँव मा, टेक्टर एको खोजे ।
खेत जोतवाना हवय, खोजत हँव मैं रोजे ।।
बोवाई हे संघरा, नांगर हा नंदागे ।
नवा जमाना खेती नवा, नवा जमाना आगे ।।

शनिवार, 9 जून 2018

हमर किसानी, बनत न थेगहा

मिलत हवय ना हमर गांव मा, अब बनिहार गा ।
कहँव कोन ला सुझत न कूछु हे, सब सुखियार गा ।।
दिखय न अधिया लेवइया अब, धरय न रेगहा ।
अइसइ दिन मा हमर किसानी, बनय न थेगहा ।।

जब कुछु आही

बुता काम बिना दाम, मिलय नही ये दुनिया ।
लिखे पढ़े जेन कढ़े, ओही तो हे गुनिया ।।
बने पढ़व बने कढ़व, शान-मान यदि चाही ।
पूछ परख तोर सरख, होही जब कुछु आही ।


गुरुवार, 7 जून 2018

अरे बेटा, गोठ सुन तो,



अरे बेटा, गोठ सुन तो, चलय काम कइसे ।
घूमत हवस, चारो डहर, घूमय मन जइसे ।।
चारो डहर, नौकरी ला, खोजत हस दुनिया ।
आसा छोड़, अब येखरे, ये हे बैगुनिया ।।

जांगर पेर, काम करथे, घर के ये भइसा ।
खेत जाबो, हम कमाबो, पाबो दू पइसा ।।
तोर अक्कल, येमा लगा, कर खेती बढ़िया ।
ठलहा होय, बइठ मत तैं, बन मत कोढ़िया ।।

‘चलायमान कोन हे‘

गुमान मन करथे, मैं हा हवँव चलायमान ।
स्वभाव काया के, का हे देखव तो मितान ।।
बिना टुहुल-टाहल, काया हे मुरदा समान ।
जभेच तन ठलहा, मन हा तो घूमे जहाँन ।।

जहान घूमे बर, मन हा तो देथे फरमान ।
चुपे बइठ काया, गोड़-हाथ ला अपन तान ।।
निटोर देखत हस, कुछ तो अब अक्कल लगाव ।
विचार के देखव, ये काखर हावे स्वभाव ।।

जाके बेटा खेत डहर

जाके बेटा खेत डहर, कांटा ला सकेल ।
आवत हावे मानसून, खातू ला ढकेल ।।
बोना हावय धान-पान, खेत-खार निढाल ।
बीज-भात ला साफ करत, नांगर ला निकाल ।।

बुधवार, 6 जून 2018

जांघ अपने काट के हम, बनावत हन साख

धर्म अउ संस्कार मा तो, करे शंका आज ।
आंग्ल शिक्षा नीति पाले, ओखरे ये राज ।।
देख शिक्षा नीति अइसन, आय बड़का रोग ।
दासता हे आज जिंदा, देश भोगत भोग ।।

देख कतका देश हावे, विश्व मा घनघोर ।
जेन कहिथे जांघ ठोके, धर्म आवय मोर ।।
लाख मुस्लिम देश हावय, लाख क्रिश्चन देश ।
धर्म शिक्षा नीति मानय, राख अपने वेष ।।

हिन्द हिन्दू धर्म बर तो, लाख पूछत प्रश्न ।
आन शिक्षा नीति देखव, मनावत हे जश्न ।।
आज हिन्दू पूत होके, प्रश्न करके लाख ।
जांघ अपने काट के हम, बनावत हन साख ।।

मंगलवार, 5 जून 2018

समय हृदय के साफ

समय हृदय के साफ, दुवाभेदी ना जानय ।
चाल-ढाल रख एक, सबो ला एके मानय ।
पानी रहय न लोट, कमल पतरी मा जइसे ।
ओला होय न भान, हवय सुख-दुख हा कइसे ।

ओही बेरा एक, जनम कोनो तो लेथे ।
मरके कोनो एक, सगा ला पीरा देथे ।।
अपन करम के भोग, भोगथे मनखे मनखे ।
कोनो बइठे रोय, हाँसथे कोनो तनके ।।

अरे जवानी

अरे जवानी भटकत काबर, रद्दा छोड़ ।
परे नशा पानी के चक्कर, मुँह ला मोड़ ।।
धरती के सेवा करना हे, होय सपूत ।
प्यार-व्यार के चक्कर पर के, हवस कपूत ।।

सोमवार, 4 जून 2018

बेजाकब्जा गाँव-गाँव

बेजाकब्जा गाँव-गाँव, लगत हवय कोढ़ ।
अपन बिमारी रखे तोप, कमरा ला ओढ़ ।।
अंधरा-भैरा साधु चोर, हवय एक रंग ।
बचही कइसे एक गाँव, दिखय नहीं ढंग ।।
-रमेश चौहान

भाव

भाव में दुख भाव मेॆं सुख, भाव में भगवान ।
भाव  जग व्यवहार से ही, संत है इंसान ।
भाव चेतन और जड़ में,  भाव से ही धर्म ।
भाव तन मन ओढ़ कर ही, करें अपना कर्म ।।

दोष देत सरकार ला, सब पिसत दांत हे

दोष देत सरकार ला, सब पिसत दांत हे ।
ओखर भीतर झाक तो, ओ बने जात हे ।
जनता देखय नही, खुद अपन दोष ला ।
अपन स्वार्थ मा तो परे, बांटथे  रोष ला ।।

वो लबरा हे कहूॅं, तैं सही होय हस ?
गंगा जल अउ दूध ले, तैं कहां धोय हस ??
तैं सरकारी योजना, का सही पात हस ?
होके तैं हर गौटिया, गरीब कहात हस ??

बेजाकब्जा छोड़ दे, तैं अपन गांव के ।
चरिया परिया छोड़ तैं, रूख पेड़ छांव के ।
लालच बिन तैं वोट कर, आदमी छांट के ।
नेता नौकर तोर हे, तैं राख हांक के ।।