रविवार, 25 नवंबर 2018

वाह रे देवारी तिहार

वाह रे देवारी तिहार
मनखे कस दगा देवत हस

जीयत भर संग देहूँ कहिके
सात वचन खाये रहेय ।
जब-जब आहूँ, तोर संग आहूँ
कहिके मोला रद्दा देखाय रहेय

कइसे कहँव तही सोच
मोर अवरदा तेही लेवत हस

आघू पढ़व ......

जनउला दोहा


1.
बिन मुँह के ओ बोलथे, दुनियाभर के गोठ ।
रोज बिहनिया सज सवँर, घर-घर आथे पोठ ।।

2.
मैं लकड़ी  कस डांड अंव, खड़-खड़ मोरे पेट ।
रांधे साग चिचोर ले, देके मोला रेट ।।

3.
खीर बना या चाय रे, मोर बिना बेकार ।
तोरे मुँह के स्वाद अंव, मोरे नाव बिचार ।।


आघू पढ़व............

बिना बोले बोलत हे

गाले मा हे लाली,  आँखी मा हे काजर,
ओठ गुलाबी चमके, बिना ओ श्रृंगार के ।
मुच-मुच मुस्कावय, कभू खिलखिलावय
बिना बोले बोलत हे, आँखी आँखी डार के ।।

आघू पढ़व............

ददरिया-ओठे लाली काने बाली

ओठे लाली काने बाली  तोला खुलय गोरी
ओठे लाली काने बाली  तोला खुलय गोरी
फुरूर-फुरूर चुन्दी हो...........
फुरूर-फुरूर चुन्दी डोले, डोले मनुवा मोरे
ओठे लाली काने बाली  तोला खुलय गोरी
ओठे लाली काने बाली  तोला खुलय गोरी



आघू पढ़व............

गुरुवार, 22 नवंबर 2018

सुघ्घर कहां मैं सबले

मैं सबले सुघ्घर हवंव,  तैं घिनहा बेकार ।
राजनीति के गोठ मा, मनखे होत बिमार ।
मनखे होत बिमार,  राजनेता ला सुनके ।
डारे माथा हाथ,  भीतरे भीतर  गुणके ।।
सुनलव कहय रमेश, रोग अइसन कबले ।
नेता हमरे पूत, कहां सुघ्घर मैं सबले ।।

- रमेश चौहान

सोमवार, 5 नवंबर 2018

मया करे हिलोर

तोर आँखी के दहरा,
मया करे हिलोर

बिना बोले बोलत रहिथस
बिना मुँह खोले ।
बिना देखे देखत रहिथस
आँखी मूंदे होले-होले

मोर देह के छाया तैं
प्राण घला तैं मोर

रूप रंग ला कोने देखय
तोर अंतस हे उजयारी
मोरे सेती रात दिन तैं
खावत रहिथस गारी

बिना छांदे छंदाय हँव
तोर मया के डोर

मोर देह मा घाव होथे
पीरा तोला जनाथे
अइसन मयारू ला छोड़े
देवता कोने मनाथे

तोर करेजा बसरी बानी
मया तोर जस चितचोर