सोमवार, 18 फ़रवरी 2019

पहिली मुरकेटव, इखर टोटा

पहिली मुरकेटव, इखर टोटा
(द्वितीय झूलना दंडक छंद)

एक खड़े बाहिर, एक अड़े भीतर, बैरी दूनों हे, देष के गा ।
बाहिर ले जादा, भीतर के बैरी, बैरी ले बैरी, देष के गा ।।
बाहिर ला छोड़व, भीतर ला देखव, पहिली मुरकेटव, इखर टोटा ।
बाहिर के का हे, भीतर ला देखत, पटाटोर जाही, धरत लोटा ।।

-रमेशकुमार सिंह चौहान