सोमवार, 29 अप्रैल 2019

दारुभठ्ठी बंद हो

दाई बहिनी गाँव के, पारत हे  गोहार ।
दारू भठ्ठी बंद हो, बचै हमर परिवार ।।
बचै हमर परिवार, मंद मा मत बोहावय ।
लइका हमर जवान, इही मा झन बेचावय ।।
जेखर सेती वोट, हमन दे हन गा भाई  ।
वादा अपन निभाव, कहत हे बहिनी दाई ।।

-रमेश चौहान

शनिवार, 27 अप्रैल 2019

नवगीत-चुनाव के बाद का बदलाही ?

चुनाव के बाद का बदलाही ?

तुहला का लगथे संगी
चुनाव के बाद का बदलाही

डारा-पाना ले झरे रूखवा
ठुड़गा कस मोरे गाँव
काम-बुता के रद्दा खोजत,
लइका भटके आने ठाँव
लहुट के आही चूमे बर माटी
का ठुड़गा उलहाही

नदिया-नरवा बांझ बरोबर
तरिया-परिया के छूटे पागी
गली-गली गाँव-शहर मा
बेजाकब्जा के लगे आगी
सिरतुन कोनो हवुला-गईली लेके
लगे आगी बुतवाही

बघवा जइसे रहिस शिकारी
अपन दमखम देखावय
बंद पिंजरा मा बइठे-बइठे
कइसे के अब मेछरावय
धरे हाथ मा भीख के कटोरा
का गरीबी छूटजाही

-रमेशकुमार सिंह चौहान

शनिवार, 13 अप्रैल 2019

नेता मन के दूध भात हे

नेता मन के दूध भात हे, बोलय झूठ लबारी ।
चाहय बैरी दुश्मन बन जय, चाहय त स॔गवारी ।।

झूठ लबारी खुद के बिसरय,  बिसरय खुद
के चोरी ।
चोर-चोर मौसेरे भाई,  करथे सीनाजोरी  ।।

सरहा मछरी जेन न छोड़े, कान जनेऊ टांगे ।
खुद एको कथा न जानय,  प्रवचन गद्दी मांगे ।।

खेत चार एकड़ बोये बर, बनहूं कहय गौटिया ।
काड़ छानही के बन ना पाये, बनही धारन पटिया ।।

दाना अलहोरव सब चतुरा, बदरा बदरा फेकव ।
बने गाय गरुवा ला राखव, हरही-हरहा छेकव ।।

-रमेश चौहान

सोमवार, 8 अप्रैल 2019

मुक्तक

नेता मन के देख खजाना,  वोटर कहय चोर हे
नेता  वोटर ले पूछत हे, का ये देश तोर हे
वोट दारु पइसा मा बेचस, बेचस लोभ फेर मा
सोच समझ के कोनो कहि दै,  कोन हराम खोर हे

बंद दारु भठ्ठी होही कहिके, महिला हमर गाँव के
वोट अपन सब जुरमिल डारिन, खोजत खुशी छाँव के
रेट दारु  के उल्टा  बाढ़े,  झगरा आज बाढ़  गे
गोठ लबारी लबरा हावय, नेता  हमर ठाँव के

बिजली बिल हाँफ कहत कहत, बिजली ये हा हाँफ  होगे
करजा माफ होइस के नहीँ, बेईमानी हा माफ होगे
भाग जागीस तेखर जागीस, बाकी मन हा करम छढ़हा
करजा अउ ये बिल  के चक्कर, अंजोरे हा साफ होगे

फोकट के हा फोकट होथे
सुख ले जादा  दुख ला बोथे
जेन समय मा समझ ना पावय
पाछू बेरा  मुड़  धर रोथे

फोकट पाये के  लालच देखे, नेता पहिली  ले हुसियार  होगे ।
कोरी-खइखा मुसवा  ला देखे, नेता मन ह बनबिलार होगे
लालच के घानी बइला फांदे, गुड़ के भेली बनावत मन भर
वोटर एकोकन गम नई पाइस, कब ठाढ़े ठाढ़े  कुसियार होगे