सोमवार, 28 अप्रैल 2014

नवा नवा सोच ले



हम तो लईका संगी, आन नवा जमाना के ।
विकास गाथा गढ़बो, नवा नवा सोच ले ।।
ऊॅच नीच के गड्ठा ला, आज हमन पाटबो ।
नवा रद्दा ला गढ़बो, नवा नवा सोच ले ।।
जात पात धरम के, आगी तो दहकत हे ।
शिक्षा के पानी डारबो, नवा नवा सोच ले ।।
भ्रष्टाचार के आंधी ला, रोकबो छाती तान के ।
ये देश ला चमकाबो, नवा नवा सोच ले ।।

दारू मंद के चक्कर, हमला नई पड़ना ।
नशा के जाल तोड़बो, नवा नवा सोच ले ।।
जवानी के जोश मा, ज्वार भाटा उठत हे ।
दुश्मन ला खदेड़बो, नवा नवा सोच ले ।।
हर भाषा हमार हे, हर प्रांत हा हमार ।
भाषा प्रांत ला उठाबो, नवा नवा सोच ले ।।
नवा तकनीक के रे, हन हमूमन धनी ।
तिरंगा ला फहराबो, नवा नवा सोच ले ।।