हिन्दू ला हिन्दू होय म, आवत हवय लाज । हिन्दू के बैरी हिन्दू, काबर हवय आज ।। सबो धरम दुनिया मा हे, कोनो करे न बैर । हिन्द ह हिन्दू के नो हय, कोन मनाय खैर ।। सबो धरम हा इहां बढ़य, हमला न विद्वेश । हमर मान ला रउन्द मत, आय हमरो देश ।। हिन्दू कहब पाप लागय, अइसन हे समाज । दुनिया भर घूमत रहिके, नई बाचय लाज ।।
एक राजर्षि की मूर्त कल्पना है शाहजहांपुर की पब्लिक लाइब्रेरी-प्रो रवीन्द्र
प्रताप सिंह
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तकनीकी क्रांति के इस दौर में जब सब कुछ डिजिटल माध्यमों पर सिमटता जा रहा है,
तब भी किताबों का आकर्षण और महत्व कम नहीं हुआ है। किताबें केवल शब्दों…
2 हफ़्ते पहले