अपने ला पहिचान, देह हस के तैं आत्मा । पाँच तत्व के देह, जेखरे होथे खात्मा ।। देह तत्व ले आन, अमर आत्मा हा होथे । करे देह ला यंत्र, करम फल ला वो बोथे ।। रंग-रूप ला छोड़ के, करम तोर पहिचान हे । मनखेपन ला मान, तोर येही अभिमान हे ।।
कहिनी:पानी हे अमोल -डोरेलाल कैवर्त
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“‘ बिन पानी नि हे जिनगानी* ” ए कहना सोलाआना सिरतोन आय । पानी के बिना जिनगी
जिए के कल्पना घलो नि करे जा सके ? हमन सबो जानत हांवन…
3 हफ़्ते पहले