हिन्दी छत्तीसगढ़ी भाखा, अंतस गोमुख के गंगा । छलछल-छलछल पावन धारा, तन मन ला राखे चंगा ।। फेशन बैरी छाती छेदय, मिलावटी बिख ला घोरे । चुटुर-पुटुर अंग्रेजी आखर, पावन धारा मा बोरे ।।
कहिनी:पानी हे अमोल -डोरेलाल कैवर्त
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“‘ बिन पानी नि हे जिनगानी* ” ए कहना सोलाआना सिरतोन आय । पानी के बिना जिनगी
जिए के कल्पना घलो नि करे जा सके ? हमन सबो जानत हांवन…
4 हफ़्ते पहले