धन धन तुलसी दास ला, धन धन ओखर भक्ति ला। रामचरित मानस रचे, कहिस चरित के शक्ति ला ।। मरयादा के डोर मा, बांध रखे हे राम ला । गढ़य चरित मनखे अपन, देख राम के काम ला । जीवन जीये के कला, बांटे तुलसी दास हा । राम बनाये राम ला, मरयादा के परकाश हा ।। रामचरित मानस पढ़व, सोच समझ के लेख लव । कइसे होथे संबंध हा, रामचरित ले देख लव ।। राम राज के सोच हा, कइसे पूरा हो सकत । कोनो न सुधारे चरित, बोलत रहिथें बस फकत ।।
लघु कथा: क्या भूत होते हैं?-रमेश चौहान
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रामाधार के पोते चिंटू ने पहली बार ये सवाल रात के दस बजे पूछा। लाइट चली गई
थी। सुमित्रा रसोई में ढिबरी जला रही थी। बाहर बँसवारी में हवा चल…
1 हफ़्ते पहले