चुन्दी (कुण्डलियां) चुन्दी बगरे हे मुड़ी, जस कोनो फड़बाज। लम्बा-लम्बा ठाढ़ हे, जइसे के लठबाज ।। जइसे के लठबाज, तने हे ठाढ़े-ठाढ़े । कंघी के का काम, सरत हे माढ़े-माढ़े ।। मुसवा दे हे चान, खालहे ला जस बुन्दी । आज काल के बात, मुड़ी मा बगरे चुन्दी ।। -रमेश चौहान
लघु कथा: क्या भूत होते हैं?-रमेश चौहान
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रामाधार के पोते चिंटू ने पहली बार ये सवाल रात के दस बजे पूछा। लाइट चली गई
थी। सुमित्रा रसोई में ढिबरी जला रही थी। बाहर बँसवारी में हवा चल…
1 हफ़्ते पहले